देशभर में बिजली की जबरदस्त कमी है. सरकारें मांग और पूर्ति की इस खाई
को पाटने में नाकाम ही रही हैं. खासतौर पर गर्मी के दिनों में तो हाल और भी
बुरे हो जाते हैं. कई इलाकों में तो 20-20 घंटे तक पावर कट रहता है. ऐसे
में उम्मीद की एक किरण राजस्थान के जैसलमेर से आयी है.
केंद्रीय ऊर्जा मंत्री डा. जितेंद्र सिंह ने गुरुवार को कहा कि राजस्थान
की भौगोलिक परिस्थतियां बेहद चुनौतीपूर्ण हैं और यहां पानी की भारी कमी है
लेकिन प्रकृति ने इस राज्य को ऐसी सौगात दी है कि सभी संसाधन समाप्त होने
पर अकेला जैसलमेर जिला पूरे देश को बिजली दे सकता है. उनके मुताबिक यहां
सिर्फ सौर ऊर्जा के माध्यम से तीन लाख मेगावाट बिजली पैदा की जा सकती है.
सिंह गुरुवार को यहां एक होटल में राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक
की 30वीं वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित समारोह को मुख्य अतिथि के रूप में
सम्बोधित कर रहे थे. उन्होंने कहा कि राज्य सरकार गांवों एवं किसानों के
विकास के लिए प्रतिबद्घ है और इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए कई
कल्याणकारी योजनाएं शुरू की हैं.
उन्होंने कहा कि नाबार्ड ने भी गांवों एवं किसानों के विकास में बहुत
बड़ी भूमिका निभाई है. उन्होंने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री स्व. इंदिरा
गांधी ने गांवों एवं किसानों के विकास के लिए आज से तीस वर्ष पहले नाबार्ड
की शुरुआत की थी. तब इसका निवेश मात्र 4, 500 करोड़ रुपए था, जो अब बढ़कर
एक लाख 85 हजार करोड़ रुपए हो गया है.
ऊर्जा मंत्री ने कहा कि नाबार्ड ने प्रदेश के विकास में बहुत बड़ा
योगदान दिया है. सड़कों से लेकर पेयजल परियोजनाओं एवं अब ऊर्जा परियोजनाओं
में भी ऋण देकर नाबार्ड ने प्रदेश के विकास में सहयोग किया है. उन्होंने
कहा कि बेहतर प्रबंधन और सरकार की कल्याणकारी योजनाओं का ही परिणाम है कि
विषम भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद प्रदेश का विकास तेज गति से हो रहा
है.
उन्होंने कहा कि प्रदेश में बिजली उत्पादन के लिए तैयार हो रहे बिजली
संयंत्रों का लगभग 90 फीसदी कार्य पूरा हो चुका है और इनके पूरे होने पर
वर्ष 2013 में प्रदेश बिजली के क्षेत्र में आत्मनिर्भर हो जाएगा और हम 5
हजार मेगावाट बिजली का अतिरिक्त उत्पादन करेंगे।
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