Monday, 7 January 2013

आसाराम एक घृणित अपराधी है, ना कि धार्मिक व्यक्ति


हरेश कुमार
आसाराम कोई पढ़ा-लिखा व्यक्ति नहीं है। वह आज से साढ़े चार दशक पहले एक साइकिल की दुकान पर पंक्चर बनाता था और वहीं पर एक बाबा रहा करते थे, जिसके भक्तों की संख्या काफी थी। एक दिन उस बाबा की मौत हो गई, फिर क्या था। इस चोर ने मौके का फायदा उठाते हुए लोगों को अपने को बाबा का अगला अनुयायी बताया फिर शनै:शनै: प्रवचनकर्ता बन गया तथा उनकी गद्दी पर बैठ गया। तभी से, यह देश भर में प्रवचन करता है।
शुरुआत में, इसके समर्थकों की संख्या उतनी नहीं थी, लेकिन जैसे-जैसे मीडिया का विस्तार होता गया, मीडिया ने अपने लाभ के लिए इसे प्रचार दिया और उसने मीडिया का लाभ लिया। दोनों एक-दूसरे के हितों की पूर्ति करते रहे औऱ देखते-देखते यह व्यक्ति कई आश्रमों का संचालक बन गया। इसके नामों से छपने वाले किताबों को कोई और लिखता है और आजकल यह हर तरह के व्यापार में संलिप्त है। जैसे कि पूजा सामग्री से लेकर धूप-दीप की बिक्री। इसके जैसे अन्य धार्मिक संस्थानों में काम करने वालों को चाहे वह किसी भी अन्य धर्म के लोगों के द्वारा चलाया जाता है, बेहद कम पैसे दिए जाते हैं और गरीबी और भूख की पेट से लाचार तथा घर से भागे बच्चे ऐसे आश्रमों के ज्यादातर शिकार बनते हैं।
ऐसे व्यक्ति के बारे में क्या कहा जाए? खुद के आश्रम ही विवादों के घेरे में है। कभी साइकिल का पंचर बनाते थे और अचानक से धार्मिक प्रवचन देने लगे। इस देश में ऐसे श्रद्धालुओं की संख्या करोड़ो में है जो अनपढ़ है और किन्हीं कारणों से परेशान है और यही लोग इन जैसों को भगवान बना देता है, जो खुद एक अपराधी होती है। अभी तक आसाराम बापू अपने आश्रम में काला जादू के नाम पर दो बच्चों की मौत और उनके साथ अप्राकृतिक यौनाचार के आरोपों से बच नहीं पाए हैं?
आसाराम का अपना चैनल ए2जेड है जो उसके धार्मिक कार्यक्रमों के प्रसारण के अलावा न्यूज़ का प्रसारण करता है और हमेशा से विवादों में रहा है।
यह इस देश का दुर्भाग्य है कि एक तरफ हमारे देश में शंकराचार्य जैसे प्रकांड विद्वान हुए हैं। वहीं कबीर जैसे लोग भी हुए हैं जिन्होंने धर्म पर करारी चोट की है। तो दूसरी तरफ ऐसे चोर-उचक्के भी हुए हैं जिन्होंने अपने झूठ और प्रचार-प्रसार के बल पर अशिक्षित जनता को लूटने में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ा। इस मामले में भारत सरकार की नीतियां सदा से अस्पष्ट रही है। अगर, समय रहते ऐसे अपराधियों पर कार्यवायी की जाती तो यह दिन नहीं देखना पड़ता।
कभी निर्मल बाबा, तो कभी कोई और बाबा तो कभी कोई और। अंत नहीं दिखता है। एक खत्म नहीं होता है कि दूसरे का उदय हो जाता है औऱ जनता उसके पीछे दीवानी हो जाती है। जनता के अंधविश्वास का फायदा ये अपराधी तत्व उठाते हैं। जैसा कि कई बार समाचार माध्यमों में देखने में आता है कि फलां युवती की अस्मत को काला जादू के नाम पर लूटा गया। फलां अपराधी ने काले जादू का उपयोग करके किसी की खुशियों को रौंद दिया। कोई फूल खिलने से पहले ही मुरझा जाता है।
इस देश में जहां धर्म और आस्था को सभी चीजों से उपर माना जाता है, वहां ऐसे उदाहरण हैं जहां काला जादू किया जाता है या इसकी पूजा की जाती है लेकिन उसके लिए सच्चे साधक होना बहुत जरूरत है ना कि डपोरशंखी बाबा। जैसा कि असम के गुवाहाटी के कामख्या मंदिर या बंगाल में काला जादू के बारे में बराबर ख़बरें सुनने को मिलती है कि वहां साधक वर्षों तक तपस्या करते हैं। हो सकता है कि यह सही हो? लेकिन इन उचक्कों के बारे में तो हर जागरूक नागरिक को पता है कि ये महज लोगों की भावनाओं और अशिक्षा का लाभ उठाते हैं।
हमारा सभी देशवासियों से आग्रह है कि सच्चाई को स्वीकारें और ऐसे दोहरे चरित्र के लोगों से यथासंभव बचने की कोशिश करें जिनका ना तो कोई ईमान है और ना ही धर्म। वे सिर्फ भावनाओं से खेलना जानते हैं। अगर किसी के आस-पड़ोस में कोई इस तरह का बंदा हो तो आपका दायित्व बनता है कि आप दूसरे को भी सतर्क करें और खुद भी सतर्क होंवे।
पैसे और पहुंच के बूते इसने अपने खिलाफ हो रहे विभिन्न न्यायालयों में हो रहे जांचों को अभी तक लटका रखा है, लेकिन कभी ना कभी पाप का घड़ा तो भरता ही है। और वो दिन ज्यादा दूर नहीं है जब इसके पापों का घड़ा फूटेगा और जनता को हकीकत मालूम होगी। इसे तत्काल अपने बयानों के लिए देशवासियों से क्षणा मांगनी चाहिए।
अपने आप को चर्चा में लाने के लिए इस तरह के बयान देने वालों को मानसिक विक्षिप्तों की श्रेणी में ही रखा जाता है। एक तरफ, पूरा देश गैंग रेप की घटनाओं के खिलाफ उबल रहा है तो दूसरी तरफ कुछ कथित धार्मिक प्रवचनकर्ता इसमें अपनी रोटियां सेंकने में व्यस्त हैं तो सत्ताधारी दल भी जनता के गुस्से को मोड़ना चाहती है और वह ऐसे तत्वों का उपयोग बखूबी कर रही है।

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